गुरुवार, 18 अगस्त 2016

साबरमती एक्सप्रेस


नरेन्द्र दामोदर दास मोदी
इसके ऊपर से उड़कर संसद पहुंचे

लोग इसमें बैठकर अपनी अपनी जगह पहुँचते हैं

मोदी जी प्रधानमंत्री हैं
बैठनेवाले भारतवासी हैं

यह ट्रेन लोहे की बनी है
ज़िंदगियां लेकर चलती है

लोहे की नहीं होती
तो साबरमती एक्सप्रेस
सावित्रीबाई होती
देश पढ़ाती

सीता होती
धरती में
समा जाती
अयोध्या नहीं जाती

-शशिभूषण

1 टिप्पणी:

  1. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल शुक्रवार (19-08-2016) को "शब्द उद्दण्ड हो गए" (चर्चा अंक-2439) पर भी होगी।
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
    --
    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
    --
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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