शनिवार, 13 फ़रवरी 2010

क्रांति के सिपाही की जेब में प्रेम कविता


मेरे सब की धुरी हो तुम
मैं दूसरों की शिक़ायतें तुम्हीं से करना चाहता हूँ
दूसरों से मिले आशीर्वाद भी तुम्हें ही दे देना चाहता हूँ
तुम मुझे सबसे सुंदर इसलिए भी लगती हो
क्योंकि मेरे भीतर की सारी सुंदरता तुम्हारे लिए है
तुम्हें चूमने तुम्हारे गले लगने की मेरी ख्वाहिश
मेरी किसी ज़रूरत को उतना पूरा नहीं करती
जितना मुझे दानी बनाती है
मैं तुम्हें प्रेम करते हुए मरूँ की कल्पना यदि करता हूँ
तो इसके पीछे यह कामना नहीं है कि मैंने सोच रखा है
प्रेम में मृत्यु मनुष्य को अमर बनाती है
बल्कि इससे दुखांत किंतु बेहतर मैं सोच ही नहीं पाता
यदि मैं इस लायक भी हो जाऊँ
कि यह दुनिया मेरे इशारों पर नाचे
तो मैं चाहूँगा तुम्हारी इच्चाओं का ग़ुलाम होऊँ
प्रिये,
मैं भी चाहता हूँ तुम्हारी तरह आस्तिक होना
संत होने की सीमा तक धार्मिक होना
भगवान का कोई ऐसा रूप गढ़ लेना
जिसे मैं मनुष्यों के कल्याण के लिए आराध सकूँ
बिना खून बहाए
औरतों,आदिवासियों,मज़दूरों,किसानों को
उनके लूटे गए हक़ दिला सकूँ
मगर ऐसा संभव नहीं हो पाता
सब ओर से घिर जाने पर
अकेला छोड़ दिए जाने पर
मैं तुम्हारी सुंदर आँखों और प्यारे चेहरे को याद करता हूँ
और आत्मतोष पा लेता हूँ
मैंने पूजा कर ली
मेरी नमाज़ अदा हो गई
मेरे सुख-दुख,स्वर्ग-नर्क तुम्हीं हो
मैं सचमुच समझ नहीं पाता
कब तुम्हें सच्चा प्रेम करता हूँ
जब तुमसे दूर होता हूँ ज़माने भर से लड़ने के लिए
या जब तुम्हें बाहों में भर लेता हूँ.


5 टिप्‍पणियां:

  1. अंतर्द्वंदों की बेहतर अभिव्यक्ति....

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  2. Priya Shashi,tumhare antardwand aur anubhootiyo ko bahut hi sundarta se ukerti tumhari rachna bahut pasand ayee.
    meri salah hai ki prem par likhte hue thought philosphy se bachne ki koshish keejiye ,prem hi anand ka mool hai.
    sneh
    bhoopendra

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  3. बहुत खूब !!!!!!!! बाद कैनवास की कविता .

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  4. Priyavar,
    mera cell no hai 9425898136.SAve kar lena.Naya kya likhna ho raha hai?
    Abhi exactly kaha ho?
    Akelapan lagta hoga par jeevan bhi yahi hai,kabhi sabkuch ,kabhi kuch nahee.
    sasneh,
    bhoopendra

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  5. भगतसिंह का सुखदेव को लिखा वह पत्र याद आया जिसमें उन्होंने प्यार के कमजोरी या ताकत होने को लेकर बहस की है। आपने याद दिला दी है तो जल्द ही बना रहे बनारस पर उसे प्रस्तुत करूंगा।

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