शनिवार, 22 अप्रैल 2017

मर्द बननेवाले मुन्ना टाइप लोग

उन्हें लंपट, लंठ, पियक्कड़, लड़कीबाज़ और गुण्डई में मुब्तिला लोगों से कतई दिक्कत नहीं होती। बचपन से लेकर आज तक वे ऐसे ही यार और भाई लोगों से घिरे रहे।

वे यारबाश रहे हैं कि निठल्ले कहना मुश्किल है। एकदम शुरुआत से वे अपने महंगे मोबाईल और कंप्यूटर में नंगी फिल्मों का शौक रखते रहे।

वे कक्षा में फेल हुए। उन्होंने ऐसे मुकाम बनाया कि लगभग पशु चिकित्सा का पैकेज अध्ययन कर कृषि विशेषज्ञता हासिल कर ली। फिर खेल, राजनीति, कला, साहित्य और तकनीकि में ऐसे माहिर हुए कि अपने गवाह और मुरीद भी वही हैं।

वे सिंगल हैं। उनके दोस्तों की सूची बनाइये तो सबसे अलहदा क्रिएटिव वही ठहरते हैं। वे प्रतिबद्ध दिखते हैं। पत्नी के मर्मान्तक आग्रहों और सतत निगरानी में स्त्रीवाद के पहरुए हैं।

वे अनुवाद कर सकते हैं। अनुमान कर सकते हैं। अपने किसी मित्र की उसकी अनुपस्थिति में गन्दी से गन्दी तस्वीर खींच सकते हैं। वे इतने कृतघ्न हैं कि घरू आवभगत को भी दुष्टता समझते हैं। लेकिन उन्होंने अपने दिल में अपनी असल तस्वीर अब तक नहीं देखी है। उन्होंने अपने काइयाँपन और अवसरवाद का अनुवाद अब तक नहीं किया है।

वे चोरी छिपे गाली दे सकते हैं, किसी की तौहीन कर सकते है। हर उस इंसान की पीठ पीछे मरजाद ले सकते हैं जो उनकी हमेशा सुड़कती नाक पर मुक्का न जड़ दे। उनकी अपार ताक़त यह है कि वे मित्रवत जुगाड़ से मिली एक ऐसी नॉकरी में हैं जिसे समझने के लिए भगवान न करे कि कोई शिक्षिका उमा खुराना की गति को प्राप्त हो।

वे हीनता से ग्रस्त हैं। एक लोटा पानी उठाकर हांफ जाते हैं। उन्होंने आगे जाने के लिए हर दौड़ लगाई, सब करके देखा लेकिन अब चरित्र हनन में ग़रक हैं। उनमें हर उस शख्स से हिकारत है जो अपनी खाता है और उनपर निर्भर नहीं है।

वे सब बर्दाश्त कर सकते हैं लेकिन किसी की सज्जनता से सांस नहीं ले पाते। वे क्या हैं, किस हद तक बीमार हैं जानते हैं। केवल उन्हें यह पता नहीं है कि कोई उनके अत्यन्त संकीर्ण और क्षुद्र राज्य में नहीं रहता। कोई ऐसी कुम्हड़ बतिया नहीं कि उनकी तर्जनी (ऊँगली) दिखाने से सूख(मर) जाए। उन्हें यह भी पता नहीं किसी के ईर्ष्या बर्दाश्त करने की एक हद होती है।

वे इस गुमान में है कि वे ब्लैकमेल कर सकते है, किसी को छदम तरीके से बर्बाद कर सकते है। उन्हें यह नहीं पता कि अपने ही किसी शुभेच्छु को नीचता की हदें पारकर आहत करने से इंसान स्वयं नष्ट हो जाता है।

वे भलीभांति जानते हैं कि वे क्या कर रहे हैं। हे प्रभु उन्हें कभी माफ़ नहीं करना वे भोलेपन और निर्दोष आत्मीयता की जड़ में मट्ठा डालनेवाले मुंहचोर हैं।

-शशिभूषण

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