गुरुवार, 25 जून 2015

हलफनामा



मैं हिंदी पढ़ाता हूँ

अंग्रेजी नहीं बोलने की माफ़ी कभी नहीं मांगूंगा
हिंदी को अंग्रेजी में पढ़ाने की कोशिश कभी नहीं करूँगा
रोमन में हिंदी नहीं लिखूंगा

मैं कभी नहीं चाहूँगा बच्चे ईमानदार लड़ाई का अनुवाद ग़लत फ़ैसले की भाषा में करें

जिन्हें अंग्रेजी न बोलना हीनता लगे वे अपना इलाज़ स्वयं कराएं
मैं अच्छी हिंदी लिखने बोलने का अभ्यास करूँगा

हो सकता है आपके खून में अंग्रेजी का नमक हो
हो सकता है अंग्रेजी में आपको पुरखों का सम्मान झलकता हो
जाने दीजिये आप जैसों से क्या लेना
आपके अपने ऋण होंगे
आपकी लज्जा समझी जा सकती है

मैं हिंदी की रोटी खाता हूँ
भाषा की नन्हीं चींटी को भी सलाम करता हूँ
अपनी जबान से मत कहियेगा
अंग्रेजी का विरोध करता हूँ

अपने हिस्से की हिंदी में मैं बचा रहूँगा
मेरी हड्डियां जब आग से निकलेंगी
कार्बन जितनी हिंदी बची रहेगी

मैं अपने पसीने का नमक हूँ
हिंदी का मास्टर हूँ
हिंदी पढ़ाता हूँ
अधमाई नहीं करूँगा
अंग्रेजी नहीं बोलने की माफ़ी कभी नहीं मांगूगा

-शशि भूषण

2 टिप्‍पणियां:

  1. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल शुक्रवार (26-06-2015) को "यही छटा है जीवन की...पहली बरसात में" {चर्चा अंक - 2018} पर भी होगी।
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
    --
    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक

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