रविवार, 14 मार्च 2010

प्यार का शिल्प

आजकल प्यार बहुत बढ़ गया है.जिस दिल में झांको प्यार का उमड़ता हुआ सागर दिखाई देगा.इतना प्यार सभ्यता के किसी दौर में नहीं था.इस प्यार को दिन दुगुना रात चौगुना फैलाने में सूचना और एसएमएस क्रांति का बड़ा हाथ है.जिसे देखो वही प्यार कर रहा है.माँ से पैसे माँगकर प्रेमिका के लिए ग्रीटिंग खरीदे जा रहे हैं.पत्नी से इशरार करके प्रेमिका के लिए पकौड़े बनवाये जा रहे हैं.बिटिया की मनुहार कर उससे उसकी सहेली को घर बुलवाया जा रहा है.कुल मिलाकर प्यार के रास्ते में कोई अपराधबोध है न बंधन.

इस समय केवल निठल्ले या बोदा लोग ही प्रेम नहीं कर रहे हैं.या फिर जिनके पास दिल जैसी कोई चीज़ नहीं होगी.हालांकि यह कहना विवादास्पद होगा कि किसी के दिल ही नहीं.इसे थोड़ा घुमाकर ऐसे कह सकते हैं कि कुछ लोग दिमाग़ का इस्तेमाल करते हुए इस सुलभ वक्त में भी दोस्ती वगैरह से धीरज धर रहे हैं.वरना प्यार इतने रूपों में आकर्षक सौगातों के साथ उपलब्ध है कि उसकी कथा कह सकने लायक पर्याप्त शिल्प का अभाव है.इतनी प्रेम कहानियाँ लेकिन क़िस्सों के वही घिसे पिटे अंत वाले शिल्प.इसीलिए तो हिंदी का कथाकार पिछड़ा हुआ है.

जैसे एक इसी कहानी का उदाहरण लीजिए एक लड़के ने तीन लड़कियों को टूटकर प्यार किया.उन्हीं लड़कियों में से एक ने उसे मिलाकर एक अधेड़ और एक अपने से छोटे लड़के को प्यार किया.आखीर में जब दोनों प्यार से भर गए तथा एक दूसरे में खुद को सीमित कर लिया तो सोचा लाइफ में प्यार के स्वर्ग के अलावा गृहस्थी का नरक भी ज़रूरी है.सो उन्होंने शादी करने की ठानी.पर लड़की के बाप ने साफ़ कह दिया देखो मैंने तुम्हारे प्यार व्यार मे कोई अड़ंगा नहीं डाला एक तरह से बढ़ावा ही दिया क्योंकि मैंने भी प्यार किया था, मैं समझता हूँ इसमें कोई बुराई नहीं, इससे व्यक्तित्व में निखार आता है.पर शादी मैं जाति के बाहर हर्गिज नहीं होने दूँगा.जैसे मैंने खुद को समझा लिया था तुम भी सही रास्ते पर आ जाओ.इसी में खानदान की इज्ज़त है.लड़की ने मन मारकर पिता का फैसला मान लिया.लड़के को ठीक वही जवाब दिया जो उसने एक लड़की के भावुक हो जाने पर दिया था कि देखो प्रिये मैं माँ-बाप की मर्जी के बगैर कुछ नहीं करूंगा.पर तुम चाहो तो हमारा प्यार कभी खत्म नहीं होगा.क्योंकि प्यार कभी मरता नहीं.

अब सोचिए यह कहानी जो वास्तव में अमर प्रेम की दास्तान है.जिससे युवाओं ने सीख भी ले ली कि सीर्यस प्रेम करने के लिए अपनी जाति की लड़की होनी चाहिए इसे लेखक कैसे लिखेगा?वह एक उदास वाक्य कहेगा कि इसके बाद वे कभी जुदा न होने के लिए एक दूसरे से दूर चले गए.और कहानी खत्म हो जाएगी.लेकिन वास्तव में कहानी यहीं खत्म नहीं होती.कहानी तो यूँ आगे बढ़ती है कि लड़की शादी के बाद जिद कर करके मायके जाती है,पूर्व प्रेमी से मिलती है.उपहारों का आदान प्रदान होता है.इस नये मिलन में उनका विद्रोह भी है कि शादी मां-बाप की मर्जी से पर प्यार अपनी मर्जी का.ऐसे ही प्रेम को अमर बनाती यह कहानी चलती रहती है.इसमें आगे यह भी जुड़ जाता है कि नयी पीढ़ी के लोग विश्वसनीय संस्थानों से प्यार की कोचिंग ले रहे हैं,अपना अपना व्यक्तित्व सँवार रहे हैं.इस कहानी को जिसमें अभी अनेक सोपान जुड़ते ही जाना है ठीक ठीक अंतहीन ढंग से सुनाने का शिल्प क्या होगा?जाहिर है इसका जवाब नहीं खोजा गया अब तक.इसीलिए कोई सबसे अच्छी प्रेम कहानी कभी नहीं लिखी जा सकी.भविष्य में भी इसकी संभावना नहीं है.कहानियाँ आज तक वहीं खत्म हो रही हैं जहां से प्रेम घर की ओर मुड़ जाता है.एक ही छत के नीचे,उसी बिस्तर में पति या पत्नी के साथ चोरी से रहने लगता है.

यही छल रोकने के लिए प्रेम बढ़ रहा है.मिट मिटकर अंतहीन हो रहा है.क्योंकि प्यार को पता है कि वह छुपकर ज़िंदा नहीं रह सकता.आप कहीं भी दफ्तर या देवालय में प्यार के इस बढ़ते शैलाब को महसूस कर सकते हैं.लेकिन आप चाहें तो मेरी इस बात को भी खारिज कर सकते हैं कि इतना प्यार सभ्यता के किसी दौर में नहीं था.

3 टिप्‍पणियां:

  1. मेरे विचार युवाओं के लिए *~~>
    भविष्य उज्ज्वल बनाना है तो समय का सदुपयोग करें फालतु के टाइम पास में क्या रखा है ।
    प्यार करना हो तो माँ बाप से करे इन बेवफा लकड़ो और लड़किया में क्या रखा हैं।
    - अंकित सोनी
    sEARcH mE oN "Ankit Sony Godly Hero" iN fAcEBook & oRkuT

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