सोमवार, 20 मार्च 2017

योग हुए, योगी भए गावहुँ मंगलचार

हम स्कूली नागरिक शास्त्र की पतली सी किताब में पढ़ा करते थे कि अशिक्षा के कारण भारत में मतदाता उदासीन रहते हैं। वे सोचते-बोलते हैं- 'कोउ नृप होय हमें का हानि।'

उसी किताब में उपाय लिखा मिलता था यदि नागरिकों को शिक्षित किया जाये तो वे ऐसे विचार त्याग कर सच्चे लोकतान्त्रिक नागरिक बन सकते हैं। बल्कि बनाये ही जाने चाहिए।

अब इतना जीवन देख लेने के बाद, थोड़ा बहुत लोकतंत्र, टेलीविजन देख बूझ और झेल लेने के बाद लगता है-नागरिक अबूझ नहीं थे। उन्हें गहरा बोध था। वे जानते थे जो लादा जायेगा उसे ही ढोना है। शेष बेमतलब का रोना है।

याद आता है पिछले दिनों उत्तर प्रदेश विधान सभा चुनावों में मिली भारी जीत के बाद भारत वर्ष के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र दामोदर दास मोदी जी ने भी बड़े सांकेतिक और बड़े खुले रूप में जो कहा वह कुछ यों था-

'हमारी सरकार सबकी सरकार है। जिन्होंने हमें चुना उनकी भी। जो सामने रहे उनकी भी। हमारी सरकार सबकी सरकार है।' (कृपया आगे समझे बेट्टा अपने मन से न पढ़ें।)

गोवा में सरकार गठन के दौरान इस बात का मर्म निकला। मैं अक्सर सोचता हूँ भारत के लोग भारत वर्ष के प्रधान सेवक जी की बातों को गौर से नहीं सुनते। यदि श्री नरेंद्र दामोदर दास मोदी जी को केवल सुन ही लिया जाये तो उसमें बड़ी योजनाएं दिख जाती हैं। खैर,

दैनिक उपयोग की वस्तुओं और योग के सबसे बड़े भारतीय कारोबारी बाबा रामदेव जी से थोड़े भिन्न मिजाज़ के योगी आदित्यनाथ जी के उ प्र का मुख्यमंत्री बनाये जाने की ख़बर है।

मानो बाक़ायदा रचे गए खुले रहस्य से सरेआम पर्दा उठ रहा है। मुझे लगता है टीवी की दुनिया में सबसे अधिक ख़ुश और संतुष्ट अंजना कश्यप को होना चाहिए। उनका अनुमान सही निकला है। बहन नेहा पन्त और ज़ी छाप एंकर्स को अभी और परिश्रम की दरकार है।

याद रखें, श्री योगी आदित्यनाथ जी ने बहन अंजना कश्यप से स्पष्ट कहा था- अयोध्या में आप लोगों की भावनाओं के अनुरूप ही राममंदिर बनेगा।

आगे चाहे जो हो लेकिन एंकर, बहन अंजना कश्यप को बधाई देने का मन होता है। यह बधाई बा हैसियत वैध या अवैध नहीं है। इसके कई और मतलब भी नहीं।

रहे भारत के लोग तो अब भारतवर्ष का नागरिक शास्त्र ही सबके माथे आ चुका है। मामूली स्वीकार नहीं होता- 'कोउ नृप होय हमें का हानि।'
-शशिभूषण

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