सोमवार, 1 फ़रवरी 2010

सैयद काशिफ़ रज़ा की कविता

एक मामूली नामवाला आदमी

कुछ लोगों के नाम
याद रखने के लिए रखे जाते हैं
और बाक़ी के पुकारने के लिए
मोहम्मद अकरम के बाप ने
उसका नाम सिर्फ़ पुकारने के लिए रखा था

कुछ लोगों के नाम
वक़्त के साथ बड़े होने लगते हैं
बाकी के और छोटे
एक दिन अकरम को भी इक्कू बना दिया गया

उसकी माँ खुश होती तो
उसे मोहम्मद अकरम कहकर पुकारती
फिर वो लोग मादूम हो गए
जिन्हें उसका असली नाम याद था

उसका नाम किसी कतबे पर
दर्ज़ नहीं किया जाएगा
इक्कू ने एक दिन सोचा
उसकी क़ब्र पुख़्ता नहीं की जाएगी

आज वो ज़िंन्दा होता तो
उसे खुशी से मर जाना चाहिए था
अस्पताल के बाहर लगी हुई
फेहरिस्त में अपना नाम
मोहम्मद अकरम वल्द अल्लाह दत्ता देखकर.
-सैयद काशिफ़ रज़ा
(प्रगतिशील वसुधा 82 से साभार)

3 टिप्‍पणियां:

  1. My name is Dr. Ashutosh Chauhan A Phrenologist in Kokilaben Hospital,We are urgently in need of kidney donors in Kokilaben Hospital India for the sum of $450,000,00,All donors are to reply via Email only: hospitalcarecenter@gmail.com or Email: kokilabendhirubhaihospital@gmail.com
    WhatsApp +91 7795833215

    उत्तर देंहटाएं