गुरुवार, 17 दिसंबर 2009

एक बार पालतू हो जाने के बाद

कल शाम सड़क पर हाथी देखा.

रास्ता चलते हाथी दिख जाए तो शुभ होता है
मानते हैं लोग.

मैंने ग़ौर से देखा हाथी को कल
महावत की शाही बैठक
हाथी की अधीन चाल.

जड़ रहा था लात महावत हाथी की गर्दन पर
प्रणाम कर रहे थे आते जाते लोग
धीमे-धीमे हिलता हुआ जा रहा था हाथी.

बड़े से बड़ा क़द भी उधर ही जाने लगता है
जिधर ठेली जाती है गर्दन.

मैने देखा
पालतू बना धरती का सबसे बड़ा जीव
तो सिर से लतियाया जा रहा है
पूज रही है दुनिया.

आदमी का जवाब नहीं
बन सकता है महावत
बना लेता है किसी को भी पालतू.

केवल पेट-पीठ रह जाते हैं
एक बार पालतू हो जाने के बाद.

8 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत बढ़िया!! भावपूर्ण रचना है।बधाई।

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  2. ek sath anek arthhon aur bhavon ki sawari dhone
    wala apka hathi lajawab hai.Badhai.
    -RACHNA ,BARELI (U.P.)

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  3. अच्छी कविता है। समय-समाज की गहरी समझ और सहज शिल्प के मेल से ही ऐसी कविता संभव हो पाती है। बधाई।

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  4. बहुत दिनो के बाद एक खूबसूरत कविता पढी है , बधाई हो

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