शुक्रवार, 11 दिसंबर 2009

पेड़ के पास

जब मुझे लगता है
इस दुनिया में मेरा कोई नहीं
कोई मुझे प्यार नहीं करता
मुझे नहीं हराना किसी को
महत्वाकांक्षाओं की दौड़ में
मैं एक पेड़ के पास जाता हूँ.

जब मैं संकल्प दोहराता हूँ
मुझे किसी से कुछ नहीं चाहिए
सिर्फ़ लौटाते रहनी हैं समय को अपनी साँसें
जब दोस्तों के लायक मेरे पास कुछ नहीं होता
मैं एक पेड़ के पास जाता हूँ.

जब मुझे जाना होता है
अपनी धरती से दूर
बहुत दिनों के लिए
मै एक पेड़ के पास जाता हूँ.

मेरे सारे पूर्वज मिलकर
इतने घने नहीं हो सकते
जितना यह पेड़
इसके लिए मैंने कुछ नहीं किया
केवल इसके फल खाते हुए
इसे अपना कहते हुए मैं जवान हुआ.

मैं जब इस पेड़ के पास होता हूँ
छाँव तले होता है मेरा वजूद
हवाएँ मुझे सराबोर कर देती हैं.

जितनी देर मैं पेड़ के पास होता हूँ
पेड़ मुझसे कुछ नहीं कहता
चुपचाप बरसाता है आशीर्वाद.

मैं लौटता हूँ दुनिया में.

4 टिप्‍पणियां:

  1. शशि जी पेड़ अकेलेपन का भी साथी होता है, ये आपकी कविता से साबित हो गया.. पेड़-पौधे तो हमेशा इंसानों के दोस्त होते हैं.. कमबख्त इंसान को ही दोस्ती करना नहीं आती..

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  2. बहुत गहरे भाव..गांव का वो पेड़ याद आ गया अहाते का.

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  3. अच्छे दोस्त का चुनाव किया है आपने। सुन्दर भाव।

    सादर
    श्यामल सुमन
    09955373288
    www.manoramsuman.blogspot.com

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  4. बहुत गहरी भावनात्मक अभिव्यक्तो शुभकामनायें

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